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Saturday, September 29, 2018

हिंदी न्यूज़ – 22 सितंबर की सुबह ने सब कुछ बदलकर रख दिया-On September 22 morning, everything changed


हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में 21 से 23 सितंबर तक हुई भारी बर्फबारी में बड़ी संख्या में देश-विदेश से सैलानी फंस गए थे. इन सभी को सेना और एयरफोर्स की ओर से रेस्क्यू किया गया. दिल्ली के आदर्श सोनी भी अपने दोस्त के साथ लाहौल के सिसु में चार दिन तक बर्फ के बीच फंसे रहे. उनके साथ कुल छह लोगों का ग्रुप था, इसमें एक महिला समेत चार विदेशी सैलानी शामिल थे.

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदर्श बताते हैं कि मैं काफी समय से पहाड़ों में ट्रैकिंग के लिए जाना चाहता था और इसे लेकर कई ट्रैक्स मेरे दिमाग में थे. चोप्टा टुगनाथ, हम्टा और देयोरिया ताल मेरी लिस्ट में सबसे ऊपर थे.

मैंने रूपकुंड ट्रेक के बारे में भी जानकारी ली, लेकिन इसके लिए ज्यादा स्टेमिना और एफर्ट्स की जरूरत थी. इसलिए मैंने और मेरे दोस्त ने तय किया कि हम हम्टा पास जाएंगे. हमने इसके लिए औपचारिकताएं पूरी की. तैयारियों और बुकिंग्स के दौरान कभी नहीं सोचा था कि यह मेरी जिंदगी का सबसे यादगार ट्रिप होगा. 3 दिन सब नॉर्मल था और फिर सब कुछ बदल गया.

आदर्श के अनुसार, 19 से लेकर 21 सितंबर तक सब कुछ नार्मल था, लेकिन 22 सितंबर की सुबह ने सब कुछ बदलकर रख दिया. शुरू में बारिश हो रही थी, लेकिन थोड़ी ही देर में बर्फ गिरने लगी. हमने चंद्रताल जाने का इरादा बदला और मनाली वापस चल दिए. इस दौरान हमें छतरू पहुंचने में छह घंटे लगे. इस दूरी को तय करने में तीन घंटे लगते हैं, लेकिन हमने छह घंटे लगाए, क्योंकि बर्फ गिर रही थी.आदर्श ने बताया कि छत्तरू से कोकसर पहुंचने पर यहां ठहरने की व्यवस्था नहीं हुई तो हम सिसु पहुंचे. यहां से आगे जाना मुमकिन नहीं था क्योंकि काफी बर्फ गिर चुकी थी. सिसु पहुंचकर उम्मीद की किरण जागी आदर्श अपने ब्लॉग में लिखते हैं सिसु पहुंचकर उन्हें घर वापसी की उम्मीद जागी. यहां हम तीन दिन तक फंसे रहे.

उन्होंने बताया कि वे रात को तारों को देखते रहते और दिन में खिड़कियों से बाहर झांकते-ताकत रहते. मन में यही चल रहा था कि घर वाले क्या सोच रहे होंगे. क्योंकि उनसे कई दिन से संपर्क नहीं हो पाया था. 24 और 25 सितंबर को बर्फबारी बंद हो चुकी थी. अब हमें उम्मीद बंधने लगी थी कि हम जल्द ही घर पहुंचेंगे.

आदर्श कहते हैं इन तीन के दौरान उन्होंने इजरायली सैलानियों के साथ गेम्स खेलकर समय बिताया. ‘स्पेशल’ 26 की वो सुबह 26 सितंबर का दिन आदर्श के लिए यादगार दिन रहा. सुबह चाढ़े चार बजे वह अपने दोस्तों के साथ उठे और पैदल ही रोहतांग टनल तक सात किमी का सफर तय किया. इस दौरान उन्होंने तीन घंटे पैदल बर्फ के बीच सात किमी की दूरी तय की और मनाली को जोड़ने वाली रोहतांग टनल के मुहाने पर पहुंचे. यहां पर काफी देर इंतजार के बाद सेना की ओर से मुहैया करवाई गई गाड़ी के जरिये मनाली छोड़ा गया.

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VIDEO: लाहौल स्पीति में फंसे 700 पर्यटकों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी





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