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हिंदी न्यूज़ – अलग अलग लड़े, फिर भी अव्वल, कांग्रेस-जेडीएस को मिली 50 फीसदी सीटें – Congress-JDS Manage Win Over 50% Seats in Karnataka


सोमवार को दोपहर एक बजे तक ज्यादातर शहरी स्थानीय निकायों के नतीजे आ गए थे. इससे पहले बीजेपी के बहुत से नेता सोशल मीडिया के हर कोने में अपनी जीत के दावे कर रहे थे. सुबह से अपने घर टीवी से चिपके बैठे प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने मीडिया के सामने आकर एक छोटा सा बयान दिया. बिना हेरफेर के उन्होंने हार स्वीकार की और कहा कि नतीजे संतोषजनक और उनकी उम्मीद के अनुरुप नहीं हैं. उन्होंने बीजेपी के खराब प्रदर्शन का ठीकरा जेडीएस-कांग्रेस गठजोड़ पर फोड़ा. अभी 21 जिलों के 105 निकायों में चुनाव हुए हैं और नौ जिलों में होने हैं.

येदियुरप्पा एक संजीदा नेता और इस नतीजे से चिंतित दिखे, क्योंकि बीजेपी इन्हीं जिलों से सबसे ज्यादा- 69 विधान सभा सीटों पर जीती थी. जबकि इस चुनाव में उसका प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा. उनकी चिंता की वजह ये भी है कि जेडीएस-कांग्रेस ने 50 फीसदी से ज्यादा सीटें पर जीत हासिल करके 55 प्रतिशत शहरी स्थानीय निकायों में सत्ता पाने जा रही है. उनके वोट शेयर में भी कोई तब्दीली नहीं हुई है.

बीजेपी ने 30 फीसदी शहरी निकायों में 35 फीसदी सीटें जीती हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को इसी से राहत है कि पार्टी को उनके गृहनगर शिमोगा में पार्टी को बड़ी जीत मिली है, लेकिन टुमकुर और मैसूर शहरी निकायों में सफलता नहीं मिल पायी. दोनों निकायों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत कांग्रेस-जेडीएस के पास है.

माना जाता रहा है कि शहरी इलाके में बीजेपी की मजबूत पकड़ है, और पार्टी के अंदरुनी जानकार भी मान रहे हैं कि पार्टी को कम से कम 50 फीसदी सीटों पर जीतना चाहिए था. बहरहाल,येदियुरप्पा का कहना है कि इन नतीजों का लोकसभा चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.येदियुरप्पा के घर से महज दो किलोमीट दूर कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव खुश थे. दो महीने पहले नियुक्त किए गए गुंडुराव का ये पहली परीक्षा थी. उन्होंने राज्य भर में प्रचार का काम किया था. उनका कहना है कि शहरी मतदाताओं ने बीजेपी को खारिज कर दिया है. भले ही मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की जेडीएस पुराने मैसूर से बाहर अपना आधार मजबूत कर पाने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन अपने पारंपरिक इलाके में उसने अपने को मजबूत किया है.

जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का कहना है कि जहां स्पष्ट बहुमत वाले नतीजे नहीं हैं वहां दोनों दलों के बीच चुनाव बाद का गठबंधन बनाया जाएगा.

न्यूज 18 से बातचीत में उन्होंने कहा, “बीजेपी चाहें जो भी कहे, उसके जनाधार में कमी आई है और हमने 125 स्थानों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा सीटें जीती हैं. लेकिन ये अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में जो होने जा रहा है उसका संकेत नहीं है.”

जेडीएस और कांग्रेस के कुछ नेताओं को लग रहा है कि अगर वे मिल कर चुनाव में उतरे होते तो 70 प्रतिशत सीटों पर उनका कब्जा होता. कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री शिवमूर्ति नाइक का कहना है कि स्थानीय मामले होने के कारण अलग-अलग चुनाव लड़ना पड़ा और आगे मिल कर लड़ा जाएगा. नतीजे सकारात्मक हैं.

कुमारस्वामी के बड़े भाई और पीडब्ल्यूडी मंत्री एचडी रेवन्ना ने इसे चार महीने पुरानी सरकार के काम-काज पर जनादेश की मुहर बताया. उनके मुताबिक-“बीजेपी को अपने बारे में चिंता करनी चाहिए. लोगों ने जता दिया है कि वे हमसे खुश हैं.” तटीय कर्नाटक में अपना आधार गवांने वाली कांग्रेस ने शहरी निकायों के चुनावों में उसे फिर से हांसिल कर लिया है. उत्तरी कर्नाटक में भी उसने काफी बेहतर किया है.

नतीजों पर एक नजर
105 शहरी स्थानीय निकाय के कुल 2664 वार्ड में से कांग्रेस को 982, बीजेपी को 927, जेडीएस को 375, बीएसपी को 13 और अन्य को 363 पर जीत हांसिल हुई है. कोडुगु जिले में हाल की बाढ़ के कारण तीन नगर पंचायतों की 45 सीटों पर चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं।





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