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Friday, September 28, 2018

हिंदी न्यूज़ – अलीगढ़ एनकाउंटर की दो कहानी क्यों बता रही पुलिस, Aligarh Police statements on an encounter. UP Police, BJP, Yogi adityanath,


20 सितंबर को देशभर ने टीवी पर अलीगढ़ लाइव एनकाउंटर देखा. दो बदमाश मारे गए जो बाइक लूटकर भाग रहे थे. जानी-पहचानी पुलिस स्टोरी के मुताबिक़ भागते हुए बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की. पुलिस ने उन्हें ज़िंदा पकड़ने के लिए आंसू गैस छोड़ी.

मगर बाद में जब पुलिस कामयाब नहीं रही तो उन्हें गोली मारनी पड़ी. पुलिस कहती है कि आंसू गैस के 15 गोले दागे गए. हालांकि पुलिस को एनकाउंटर के बाद बिल्डिंग से आंसू गैस के गोले का एक खाली शैल ही मिला.

एफआईआर में इसका ज़िक्र है. यह अकेला विरोधाभास नहीं. न्यूज18 हिंदी की पड़ताल में 7 से ज़्यादा बिंदु ऐसे निकले हैं जिन पर मीडिया में पुलिस के बयान और काग़ज़ पर दर्ज डेटा में फ़र्क है. ऐसे ही कुछ विरोधाभासों की सूची यहां है.

फोटो- बिल्डिंग में घिरे बदमाशों से मोर्चा लेती पुलिस.

मीडिया में- प्रेस नोट में बाइक का नंबर UP81 VK4819 हीरो होंडा स्पेलंडर.

एफआईआर- UP81 BK4519 हीरो स्पेलंडर दर्ज किया गया है.

मीडिया में- बदमाशों से मिले हथियारों में 315 बोर के 17 खोखे.

एफआईआर- 315 बोर के 12 खोखे दर्ज हैं.

फोटो- बदमाशों की ताक में पेड़े की आड़ लेकर बैठी पुलिस.

मीडिया में- बताया जाता है कि सर्विलांस प्रभारी को बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और वो बाल बाल बच गए.

एफआईआर- सर्विलांस प्रभारी अभय शर्मा की बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगने का कोई जिक्र नहीं किया गया है.

मीडिया में- बदमाशों को कोठरी से बाहर निकालने के लिए 15 गोले आंसू गैस के छोड़े गए.

एफआईआर- जिस बिल्डिंग में बदमाश बंद थे वहां एक आंसू गैस के गोले का शैल मिलने का जिक्र एफआईआर में किया गया है.

मीडिया में- सुबह चेकिंग के दौरान बाइक को रुकने का इशारा किया. लेकिन बदमाशों ने फायरिंग शुरु कर दी.

एफआईआर- बिल्डिंग में घिर जाने के बाद बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरु की.

फोटो- एनकाउंटर स्थल पर पहुंची फील्ड यूनिट कुछ इस तरह से सबूत जुटाने लगी.

मीडिया में- एसएसपी कह रहे हैं कि कि बदमाशों के पास से दूसरे हथियार सहित छर्रे भी मिले हैं.

एफआईआर- बदमाशों के पास से छर्रे मिलने वाली बात एफआईआर में दर्ज नहीं की गई है.

मीडिया में- विडियो में एसएसपी गोलियां चलाते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं.

एफआईआर- लेकिन इस बात को एफआईआर में छिपाया गया है. एफआईआर में बताया गया है कि चार लोगों द्वारा 2-2, दो लोगों द्वारा 1-1 गोली 9 एमएम पिस्टम से चलाई गई. वहीं एक सिपाही द्वारा पम्मगन राइफल से 4 गोलियां चलाई गई हैं.

आंसू गैस का गोला दागते एसपी सिटी अलीगढ़.

इन सवालों पर खामोश क्यों है पुलिस

लाइव एनकाउंटर के जिस कारनामे को अलीगढ़ पुलिस ने अंजाम दिया उस पर पुलिस ने सम्मान भी करा लिया. मगर बसपा के पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, कांग्रेस के पूर्व सांसद विजेन्द्र सिंह, रालोद नेता, सामाजिक संस्था रिहाई मंच के पदाधिकारी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं.

मगर पुलिस ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है. उल्टे कहा जा रहा है कि जवाब मांगने थाने गईं सामाजिक कार्यकर्ता मारिया आलम की कार पूरे काग़ज़ होने के बावजूद भी सीज कर दी गई. न्यूज18 हिन्दी ने ऐसे ही कुछ सवालों की लिस्ट बनाई है.

फोटो- बिल्डिंग में घिरे बदमाशों पर निशाना साधता पुलिस का जवान.

पाली मुकीमपुर, रूपवास में साधु हत्याकांड का पहला खुलासा –

-13 अगस्त- साधु और किसान की हत्या पर एसएसपी अलीगढ़ ने कहा था कि ये ज़मीन और लूट के लिए की गई हत्या मालूम होती है.

-18 अगस्त- एसएसपी ने कहा कि हत्या एटा में हुए एक मर्डर केस के गवाहों को फंसाने के लिए की गई. एसएसपी के मुताबिक़ घटनास्थल से गवाहों के नाम की पर्ची मिली थी. 13 अगस्त को इसका कोई ज़िक्र नहीं हुआ था

– 22 अगस्त- पुलिस को पता चला कि हत्या तुलसी, बबलू और विजय ने की है. अचानक यह कैसे हुआ, साफ नहीं है. हत्या में इस्तेमाल डंडा कहां से मिला साफ़ नहीं.

– एनकाउंटर में मारे गए नौशाद-मुस्तकीम हत्यारोपी हैं, पुलिस के पास इसके सबूत क्या थे, साफ़ नहीं.

फोटो- बदमाशों पर गोली दागते सफेद जैकेट और नीली जींस में एसएसपी अलीगढ़ अजय साहनी.

नौशाद-मुस्तकीम एनकाउंटर पर सवाल-

पुलिस- बदमाशों के सीने में दो-दो गोली लगी थीं

सवाल- पुलिस ने कुल 14 गोली चलाने की बात कही, जिनमें 2-2 गोली युवकों के सीने में लगीं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कोई गोली नहीं मिली

पुलिस- बदमाशों ने मरने से पहले अपने नाम-पते बताए थे.

सवाल- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार युवकों के दिल और गुर्दे गोली लगने से डैमेज हो गए थे. ऐसे में वो पुलिस से बात कैसे कर सके.

पुलिस- घायल इंस्पेक्टर को वरुण ट्रॉमा सेंटर और बदमाशों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया.

सवाल- घायल युवकों को ट्रॉमा सेंटर न ले जाकर भीड़भाड़ वाली सड़क से होकर करीब 6 किमी दूर जिला अस्पताल क्यों ले जाया गया

फोटो- बदमाशों के सीने में दो गोली लगने के बाद निकला खून.

पुलिस- मरने से पहले गाड़ी में बदमाशों ने अपने बयान दर्ज कराए थे.

सवाल- एनकाउंटर को लाइव शूट कराने वाली पुलिस ने बयान का वीडियो क्यों नहीं बनवाया.

पुलिस- मारे गए बदमाशों पर आठ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं.

सवाल- पुलिस मुकदमों की तारीख नहीं बता रही है. युवकों पर एक मुकदमा मरने से 7 घंटे पहले, तीन मुकदमे मरने के बाद दर्ज किए गए. 4 मुकदमे जिस घटना के बताए जा रहे हैं वो मरने से 36 दिन पुरानी हैं. 25-25 हजार रुपये का इनाम भी मरने से तीन-चार दिन पहले ही घोषित हुआ.

फोटो- ट्रिगर पीछे और ट्रिगर से उंगली पीछे रखकर गोली चलाने को तैयार बैठा एक सिपाही.

पुलिस- बदमाशों ने तालानगरी में दो युवकों से बाइक लूटी थी.

सवाल- इनाम घोषित होने और बाइक लूटने के बाद भी युवक रातभर तालानगरी से कुछ ही दूरी पर 7 घंटे घूमते रहे और पुलिस को पता नहीं चला.

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पुलिस- एनकाउंटर के दौरान सर्विलांस टीम इंचार्ज अभय शर्मा की बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी.

सवाल- 18 मई को दादो, अलीगढ़ में हुए एनकाउंटर में भी अभय शर्मा के सीने पर बुलेट प्रूफ जैकेट से गोली टकराई थी.

सवाल- सीने में दो गोली लगने के बाद भी कोठरी की ज़मीन पर खून का सिर्फ छोटा सा निशान क्यों है.

फोटो- बदमाशों का एनकाउंटर करने जाते एसएसपी, एसपी सिटी और उनकी टीम.

इस पूरे मामले में जब एडीजी आगरा जोन, डीआईजी अलीगढ़, एसएसपी अलीगढ़ से बात करने की कोशिश की गई तो एडीजी मामले को टालते रहे. डीआईजी ने अलीगढ़ एनकाउंटर का नाम सुनते ही बात करने से इंकार कर दिया. वहींं एसएसपी अलीगढ़ ने फोन नहीं उठाया और मैसेज का भी कोई जवाब नहींं दिया.

वहीं अलीगढ पुलिस एनकाउंटर पर और एफआईआर में गड़बड़ी के सवाल पर डीआईजी लॉ एंड आर्डर प्रवीण कुमार का कहना है ̔एनकाउंटर के मामले में पूरे प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय पीयूसीएल गाइडलाइंस का पालन किया जा रहा है. इस एनकाउंटर में भी विवेचना और मजेस्ट्रीयल जांच सब नियम के मुताबिक हो रहा है.̓

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पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है मीडिया के माध्यम से आने वाली खबरें सुनने के बाद ऐसा लगता है कि ये सब कुछ पहले से तय था. अलीगढ़ पुलिस द्वारा मीडिया को कुछ और बताना वहीं एफआईआर में कुछ और दर्ज करना एनकाउंटर को संदेह के दायरे में लाता है. इसकी अच्छी तरह से जांच होनी चाहिए.

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रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब का कहना है तीन पुलिस वालों के साथ मिलकर एसपी सिटी फायरिंग कर रहे हैं. पास में ही चार-पांच पुलिस वाले खड़े होकर आराम से बात कर रहे हैं. सिपाही एक कैमरामैन के इशारे पर निशाना साधने की कोशिश कर रहा है. इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे ये एनकाउंटर नहीं ड्रिल थी और फोटो सेशन चल रहा था.





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