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हिंदी न्यूज़ – केंद्र सरकार ने किया किनारा, कहा- केंद्रीय विद्यालय में सुबह की प्रार्थना से कुछ नहीं है लेना-देना-central government keeps away from prayer in kendriya vidyalaya


News18.com

Updated: September 4, 2018, 9:52 AM IST

केंद्रीय विद्यालयों में हाथ जोड़कर हिंदी और संस्कृत में प्रार्थना किए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने किनारा कर लिया है. हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्री केंद्रीय विद्यालय संगठन का चेयरमैन होता है. मंत्रालय द्वारा मामले में दिए गए शपथपत्र में कहा गया है कि उसका इस मामले से कुछ भी लेना देना नहीं है.

मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय विद्यालयों में सुबह हाथ जोड़कर संस्कृत और हिंदी में प्रार्थना गाने से मंत्रालय का कोई संबंध नहीं है. कोर्ट ने इस मामले में मंत्रालय को नोटिस जारी किया था. नोटिस का जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा कि केवीएस कई कमेटी और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अंतर्गत काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है. संभावना है कि कोर्ट याचिका पर फिर से सुनवाई 10 सितंबर को करेगा.

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इसी सवाल को लेकर दायर पीआईएल पर केंद्र से जवाब तलब किया था. एक टीचर की तरफ से दायर इस पीआईएल में सवाल किया गया था कि सरकारी अनुदान पर चलने वाले स्कूलों में किसी खास धर्म को प्रचारित करना उचित नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र और केंद्रीय विद्यालय स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया था.बेंच ने कहा था, “केंद्रीय विद्यालयों में बच्चों को हाथ जोड़कर और आंख बंद कर प्रार्थना क्यों कराई जाती है?” पीआईएल में संविधान के आर्टिकल 92 के तहत ‘रिवाइस्ड एजुकेशन कोड ऑफ केंद्रीय विद्यालय संगठन’ की वैधता को चुनौती दी गई थी. आर्टिकल 92 के मुताबिक, “स्कूल में पढ़ाई की शुरुआत सुबह की प्रार्थना से होगी. सभी बच्चे, टीचर्स और प्रिंसिपल इस प्रार्थना में हिस्सा लेंगे.” इस आर्टिकल में केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली सुबह की प्रार्थना की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है.

पिटिशनर का कहना था कि सरकारी स्कूलों में धार्मिक विश्वासों और ज्ञान को प्रचारित करने के बजाय साइंटिफिक टेंपरामेंट यानी वैज्ञानिक मिजाज को प्रोत्साहित करना चाहिए. साथ ही संविधान के आर्टिकल 28 (1) और आर्टिकल 19 (मौलिक अधिकारों) को संरक्षण देना चाहिए.

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पीआईएल में कहा गया था, “आर्टिकल 19 नागरिकों को मौलिक अधिकार के तहत अभिव्यक्ति का अधिकार भी देता है. ऐसे में छात्रों को किसी एक धार्मिक आचरण के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए.”

पीआईएल में शिकायत की गई थी कि केंद्रीय विद्यालयों में बच्चों को प्रार्थना करना अनिवार्य है. जिसे किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता.





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