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हिंदी न्यूज़ – जहां साक्षी मलिक करती थी प्रैक्टिस, वहां के हालात बद से बदतर-conditions are worst where wrestler sakshi malik practiced


छोटूराम स्टेडियम में प्रैक्टिस कर महिला पहलवान साक्षी मलिक ने देश के लिए ओलम्पिक में पदक जीता था, वहां के हालात बदतर होते जा रहे हैं. पहलवानों के पास सुविधाओं का अभाव है, आप सोच भी नहीं सकते कि एक मैट पर 200 पहलवान प्रैक्टिस करते होंगे, लेकिन ये बिल्कुल सच है. इन पहलवानों के पास एक मैट और एक कोच के अलावा कुछ भी नहीं है. ये हालात तब हैं, जब इनमें से 15-20 तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के हैं.

यहां शिफ्ट में करने पड़ती है पहलवानों को प्रैक्टिस

साक्षी मलिक के मेडल लाने के बाद सरकार ने रेसलिंग हॉल के लिए कई घोषणाएं की थी. उस घोषणा को दो साल बीत गए, पर खिलाड़ियों को इसका फायदा नहीं मिला. अब तो इन पहलवानों को शिफ्ट में प्रैक्टिस करनी पड़ती है, अगर जिम जाना हो तो बाहर जाते हैं. कई बार तो खुले आसमान के नीचे मिट्टी पर मैट बिछाकर प्रैक्टिस करनी पड़ती है.

साक्षी के मेडल जीतने पर सरकार ने की थी ये दो घोषणाएंजिस वक्त साक्षी मलिक ने मेडल जीता, तब सरकार ने इस स्टेडियम के लिए दो बडी घोषणाएं की थी, जिनमें से पहली ये थी कि रेसलिंग हॉल को एसी बनाया जाएगा और इसमें पहलवानों के लिए सभी सुविधाएं दी जाएंगी. लेकिन दो साल बीत गए, इसका काम अभी भी अधूरा है, हॉल पर ताला लगा हुआ है. दूसरी घोषणा ये थी कि साक्षी मलिक को ट्रैनिंग देने वाले कोच मंदीप का प्रमोशन किया जाएगा और उसे इनाम दिया जाएगा, लेकिन न तो कोच को इनाम दिया गया और न ही उनका प्रमोशन किया गया.

खिलाड़ी इस इंतजार में कब मिलेगी सुविधाएं

अब हालत ये है कि इन पहलवानों के पास पहले जो हॉल था, अब वह भी नहीं रहा. स्टेडियम के अन्दर ही इधर-उधर मैट लगाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं. हालांकि रेसलिंग हॉल में काम पूरा हो चुका है, लेकिन गुणवत्ता को लेकर आपत्ति आ गई, जिस कारण इसे स्टेडियम को हैंड ओवर नहीं किया गया. खिलाड़ी इस इंतजार में हैं कि उन्हें कब सुविधाएं मिलेंगी और ढंग से प्रैक्टिस कर पाएंगे.

रितू मलिक, अन्तर्राष्ट्रीय पहलवान

क्या है पहलवानों का कहना 

अन्तर्राष्ट्रीय पहलवान रितू मलिक का कहना है कि सरकार मेडल जीतने के बाद खिलाड़ी को तो खूब इनाम देती है, लेकिन एक खिलाड़ी बनने के लिए जो सुविधाएं देनी चाहिए, वे नहीं देती. उनका कहना है कि हरियाणा की खेल नीति सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन खेल के मैदान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. हम अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों में जाते हैं और सुविधाओं के नाम पर हमें कुछ नहीं मिलता. खिलाड़ी को इतने बड़े इनाम की जरूरत नहीं है, खेल को जरूरत है.

पिंकी, अन्तर्राष्ट्रीय पहलवान

दो सालों से झेलनी पड़ रही परेशानियां

वहीं, अन्तर्राष्ट्रीय पहलवान पिंकी का भी यही कहना है कि पिछले दो साल से हमें बहुत परेशानी हो रही है, न तो प्रैक्टिस का समय मिलता और न ही कोई अन्य सुविधा. इससे अच्छा तो हमारा पहले वाला हॉल ही था, उसमें दो मैट होते थे, कम से कम प्रैक्टिस तो ढंग से कर लेते थे.

प्रशासनिक आपत्ति के चलते नहीं मिल रहा रेसलिंग हॉल

इस बारे में जब कोच मंदीप से बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि किसी प्रशासनिक आपत्ति के चलते उन्हें रेसलिंग हॉल नहीं मिल रहा. सरकार और प्रशासन को इसमें दखल देना चाहिए औऱ समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए. जब उनसे उनके प्रमोशन और उनाम के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें भी अभी तक कुछ नहीं मिला है.





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