हिंदी न्यूज़ – क्यों रखे गए हैं एक ही पुनर्वास केंद्र में गीर अभयारण्य के 31 शेर – Evacuated 31 lions put at one place in vicinity of Sanctuary raises concerns


विजयसिंह परमार

संक्रमण से बचाव के लिए निकाले गए 31 शेरों को एक ही जगह और गीर अभयारण्य के नजदीक रखे जाने चिंता जाताई जा रही है. शेरों को जिस स्थान पर रखा गया है वो अभयारण्य से बहुत दूर नहीं है.

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वन विभाग ने ये कदम 11 सितंबर से 23 शेरों के मर जाने के बाद उठाया. इन शेरों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वाइरस ( CDV) और बैबेसिया पैरासाइट के संक्रमण की वजह से हुई हैं. डलखानिया वन रेंज से निकाल कर बचाव के लिए इन 31 शेरों को जामवाला पुनर्वास केंद्र में रखा गया है.एशियाई शेरों के इकलौते ठिकाने, गीर अभयारण्य में मरे शेरों से लिए गए नमूनों की जांच के बाद पुणे की इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ वाइरॉलॉजी ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि चार शेरों में सीडीवी के वाइरस थे. इसी सीडीवी और बैबेसिया के संक्रमण की वजह से तंजानिया में 1994 में एक हजार शेरों की मौत हो गई थी.

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प्रधान मुख्य  वन संरक्षक (वन्य जीव) अक्षय कुमार सक्सेना ने अपने हालिया बयान में दो दिन पहले कहा था कि निकाल कर लाए गए 31 शेर सेहदमंद हैं. उन्हें महज सावधानी के तौर पर शेरों के बीच से निकाला गया है.

शेरों की हिफाजत के लिए विशेषज्ञ की राय जानने को न्यूज 18 ने शेरों के विशेषज्ञ डॉक्टर वाइ वी झाला से संपर्क किया. डॉ. झाला वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से जुड़े हुए हैं. उनका कहना है-“मैंने जामवाला के उस पुनर्वास केंद्र को नहीं देखा है, कि वहां शेर कैसे रखे जा रहे हैं. लिहाजा मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता. फिर भी मैं ये कहूंगा कि शेरों को बचा कर निकाला गया है और जंगल के जानवरों से अलग रख कर उनकी निगरानी की जा रही है, यही किया भी जा सकता था.”

वन विभाग के साथ काम करने वाले एक संरक्षक का कहना है-“पिछले अनुभवों से एक चिंता ये है कि लंबे समय तक अलग रखने से शेरों के व्यवहार में तब्दीली आ जाती है. दो साल पहले 18 शेरों को अलग करके रखा जशाधार पुनर्वास केंद्र में रखा गया था. इनमें तीन गर्भवती शेरनियां भी थी. जानवर डिप्रेंसन में आ गए. नतीजतन शेरनियों को वक्त से पहले ही सात बच्चे हो गए. कुछ ही वक्त में सातों शावक मर भी गए. इसके बाद शेरों को खुले में धारी ले जाया गया. हमें डर है कि पिछली बार की गलती फिर से दुहराई न जाय. जैसे ही पता चले कि शेर सेहतमंद हैं उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिए.
जूनागढ़ सर्किल के मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डीटी वसावडा ने न्यूज 18 को बताया कि शुरुआती संकेतों से पता चल रहा है कि ये शेर सेहतमंद हैं. लेकिन लैब की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. ताकि पक्के तौर पर कहा जा सके कि शेरों को कोई बीमारी नहीं है. कोशिश ये है कि शेर जब छोड़े जाए तो उन्हें किसी तरह का रोग न हो.

उनका ये भी कहना है कि जामवाला पुनर्वास केंद्र में संक्रमण का कोई खतरा नहीं है और वहां कोई संक्रमित जानवर नही रखा गया है. इस बीच वन विभाग ने चार शेरों और एक तेंदुए को जशधार केंद्र में लाया गया है. ये राजुला के नजदीक है.

एस वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक-“हमने चार शेरों के साथ एक तेंदुए को राजुला पहुंचाया है ताकि ये इन्हें दूसरे संक्रमित शेरों से अलग रखा जा सके, क्योंकि ये स्वस्थ हैं.” ये केंद्र जशधार से 15 किलोमीटर दूरी पर है. अभयारण्य में शेरों की अंतिम गिनती के मुताबिक गीर में कुल 523 एशियाई शेर है.





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