हिंदी न्यूज़ – कोटा विधानसभा सीट पर राजनीतिक दलों की दावेदारी-Claiming political parties on Kota assembly seat


कोटा विधानसभा सीट से दावेदारी पेश करने में जुटे तमाम राजनैतिक दल
कोटा विधानसभा सीट से दावेदारी पेश करने में जुटे राजनीतिक दल
Sanjay Manikpuri

Sanjay Manikpuri

| News18 Chhattisgarh

Updated: October 7, 2018, 1:48 PM IST

छत्तीसगढ़ प्रदेश की कोटा विधानसभा सीट पर आज तक कांग्रेस के अलावा किसी दूसरी पार्टी का खाता नहीं खुला पाया है. हालांकि इस बार समीकरण ऐसे बन रहे हैं जिससे बीजेपी को जीत की आस जगी है. बता दें कि कोटा विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. इस सीट पर पिछले 66 वर्षों से कांग्रेस का कब्जा है. इस सामान्य सीट में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने से राजनीतिक समीकरण बदलते रहते हैं. इस कारण जनता कांग्रेस (जे) पार्टी के सुप्रीमो अजीत जोगी का प्रभाव इस सीट पर नजर आ सकता है. वहीं बीएसपी से हुए जोगी के गठबंधन ने भी पार्टी को मजबूत किया है.

पिपरतराई से लेकर जलेश्वर महादेव अमरकंटक तक फैली यह सीट आदिवासी बाहुल्य है. इस विधानसभा पर पिछले 14 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपना कब्जा जमा रखा है. बता दें कि यहां से पहली महिला विधायक डॉ. रेणु जोगी हैं. इस सीट पर पिछले 3 चुनाव से कांग्रेस की टिकट पर अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी चुनाव जीतती आ रहीं हैं. हालांकि इस बार इस सीट में बदले समीकरण नजर आ रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने जबसे अपनी नई पार्टी बनाई है, तब से रेणु जोगी के कांग्रेस से और उनकी पार्टी से उम्मीदवारी के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि रेणु जोगी ने कांग्रेस पार्टी का दामन अभी तक छोड़ा नहीं है. इससे दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

कांग्रेस से मिल रही लगातार उपेक्षा और दावेदारों की बढ़ती फेहरिस्त बताती है कि रेणु जोगी को किनारा दिखाया जा सकता है. वहीं लंबे समय तक रेणु जोगी के विधायक रहने से क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. इस सीट का विस्तार गौरेला और पेंड्रा जैसे आदिवासी क्षेत्र तक है. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का भी इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है.बहरहाल, चुनाव के पास आते ही सियासी हलचल बढ़ने लगी है. कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी अपनी चुनावी रणनीति में जुट गए हैं. बता दें कि कांग्रेस से कोटा विधानसभा सीट के लिए कई दावेदार हैं. इस दावेदारी में सीवी रमन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव शैलेश पांडेय भी शामिल हैं. वहीं बीजेपी से भी दबे रूप में कई जिला कार्यकारिणी, मंडल अध्यक्ष और पंचायती नेता टिकट के सपने देख रहे हैं. बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी काशीराम साहू इस दौड़ में सबसे आगे हैं.

बता दें कि काशीराम दूसरी बार टिकट पाकर बीजेपी में जीत को सुनिश्चित करने का दावा कर रहे हैं. वहीं जनता कांग्रेस जे पार्टी में असमंजस की स्थिति बरकरार है. अभी तक पार्टी ने किसी को अपना चेहरा नहीं बनाया है. वहीं दिल्ली में राष्ट्रीय पार्टियों को धूल चटाने वाली आम आदमी पार्टी ने हरीश चंदेल को अपना प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में अब देखना होगा कि आने वाले चुनाव में कौन सी पार्टी जनता की कसौटी पर उतरती है.

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