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Saturday, October 13, 2018

हिंदी न्यूज़ – छात्रों को हिन्दू-मुस्लिम समूहों में बांटने वाले स्कूल के अंदर की कहानी, इसलिए सब अंजान थे बाहर-Inside the Delhi School That Partitioned Hindu-Muslim Students and Why No One Outside Had a Clue


(मानस मिट्टुल)

पांचवी कक्षा में पढ़ने वाला दस वर्षीय अमन वजीराबाद में अपने म्युनिसिपल स्कूल के दरवाजे पर खड़ा था. वह 45 मिनट पहले स्कूल पहुंच गया था. दोपहर एक बजे तक उनका स्कूल शुरू नहीं हुआ था.

समय के साथ मैन गेट के पास बातूनी बच्चों का एक समूह इक्ट्ठा हो गया और प्रिंसिपल’ के बारे में बात करनी शुरू कर दी. अमन ने कहा, “एक दिन उन्होंने हम सभी को खड़ा किया और कहा ‘मुस्लिम बच्चे अपना हाथ ऊपर उठाओ.’ फिर उन्होंने हम सभी को अलग कर दिया.

बुधवार को वजीराबाद के गली नंबर 9 में अमन का नॉर्थ दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्परेशन स्कूल राष्ट्रीय समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गया. स्कूल के इंचार्ज सीबी सिंह शेहरावत ने छात्रों को उनके धर्म के आधार पर बांट दिया था.हिन्दुओं को अलग एवं मुस्लिमों को अलग समूहों में विभाजित किया गया था. जब दिल्ली सरकार और म्यूनिसिपल कॉर्परेशन को इसके बारे में पता चला तो शेहरावत को सस्पेंड कर दिया गया. गुरुवार को अधिकारियों ने अलग-अलग सेक्शन को भंग कर दिया और इस मामले की जांच शुरू कर दी. जो बच्चे शुक्रवार को स्कूल नहीं आए थे उन्हें अब भी पता नहीं है कि आखिर हुआ क्या था और वे कहां बैठेंगे?

“क्या प्रिंसपल सर जेल में हैं?”

“नहीं उन्हें केवल सस्पेंड किया गया है”

“तो क्या वह वापस आएंगे?”

निशान्त की उम्र भी 10 साल है, उसने बताया कि धर्म के आधार पर बांटने की शुरुआत कुछ महीने पहले उस वक्त शुरू हुई जब जुलाई में शेहरावत ने चार्ज लिया. निशान्त ने कहा, “उन्होंने कहा कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हिन्दू और मुस्लिम लड़ते हैं.” उसके दोस्त दानिश को दूसरे सेक्शन में भेज दिया गया.

म्यूनिसिपल कॉर्परेशन स्कूल में सुबह 07:30 से दोपहर 12:30 तक लड़कियों का कक्षाएं चलती हैं. शाम की शिफ्ट में लड़कों को पढ़ाया जाता है, जो दोपहर 1:00 से शाम 6:00 बजे तक चलती है. दोनों शिफ्टों के लिए अलग-अलग अध्यापक हैं.

लड़कियों के सेक्शन में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया था. केवल लड़कों की शिफ्ट को धर्म के आधार पर बांटा गया था. सुबह की शिफ्ट में काम करने वाले टीचर्स ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि शाम की शिफ्ट में स्कूल में क्या हो रहा था. यहां तक कि स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों के माता-पिता ने भी कहा कि उन्हें इस बारे में तभी पता चला जब यह मामला समाचारों में आया.

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इरशाद हुसैने की बेटी स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ती है. वह नहीं जानते थे कि हर दिन 12:30 बजे जब वह अपनी बेटी को लेने स्कूल जाते हैं तो उसके बाद स्कूल बदल जाता है. उन्होंने कहा, “मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था. दो दिन पहले सबके जानने के बाद मैंने अपनी बेटी से पूछा जो स्कूल में आठवी कक्षा में पढ़ती है. उसने कहा कि यह सच है. उसकी दोस्त ने उसे बताया था.

यहां तक कि कुछ लड़कों के पिता को भी इस बात की जानकारी नहीं थी. अजीत थापा के बेटे ने कभी उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी. थापा कहते हैं, “अगर कुछ ऐसा किया गया तो यह गलत है. बच्चे साथ और समान होने चाहिए. स्कूल को शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए.”

अमन ने बताया कि कुछ बच्चे घर वापस गए और अपने माता-पिता को बताया. अमन ने कहा, “कुछ माता-पिता आए और उन्होंने पूछा कि ऐसा क्यों किया? उन्होंने (शेहरावत) कहा कि वह हेड टीटर हैं वह जैसे चाहें वैसे पढ़ा सकते हैं.”

जिन्होंने न्यूज18 से बात की उन्होंने भी कहा कि शेहरावत का आचरण स्कूल के शिक्षक की अपेक्षा काफी कम थी. छात्रों ने कहा कि शेहरवात ने उनपर हाथ उठाया और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया. एक छात्र ने आरोप लगाते हुए कहा, “सर अक्सर छात्रों को मारते और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे. वह स्कूल परिसर में बीड़ी पीते थे.”

नाम न छापने की शर्त पर स्कूल के एक टीचर ने कहा कि बाकी टीचर शेहरावत से डरते थे कि कहीं वह उनकी रैंक कम न कर दे.  टीचर ने कहा, “वे चिल्लाते थे और आक्रमक हो जाते थे. इसलिए हम उनसे इस बारे में बात करने से डर रहे थे. उन्हें लग रहा था कि जो उन्होंने किया वह सही था.”

जब दूसरे टीचरों ने छात्रों को धर्म के आधार पर अलग करने के बारे में चिंता प्रकट की तो शेहरवात ने कहा कि यह उनका निर्णय है और उन्हें इस पर चिंता करने की कोई जरूर नहीं है. टीचर ने कहा, “हम जूनियर टीचर हैं. हम बहुत अधिक नहीं कह सकते हैं. ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था. यह भारत है. यहां तक कि एक अति सांप्रदायिक व्यक्ति को भी बच्चों के साथ ऐसा नहीं होने देना चाहिए.

वजीराबाद में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शकुन्तला ने भी शेहरावत के आक्रमक आचरण के बारे में बात की और कहा, “मैं उनके साथ चुनाव ड्यूटी पर थी तब मेरी उनसे बातचीत हुई थी. उनकी भाषा बहुत असभ्य थी और उनकी सोच बहुत पिछड़ी थी.”

आंगनबाड़ी में शकुन्तला के साथ काम करने वाली शगुफ्ता ने बताया कि कुछ साल पहले म्यूनिसिपल स्कूल से उनके दो बेटों ने पढ़ाई की. उन्होंने कह, “उस समय वहां ऐसी कोई समस्या नहीं थी. उस वक्त के प्रिंसिपल काफी अच्छे व्यक्ति थे. जब मैंने हिन्दू और मुस्लिमों को अलग करने के बारे में सुना तो मैं जांच के लिए आई.”

स्कूल के आसपास के दुकानदारों का कहना है कि वह नहीं जानते थे कि बंद मैन गेट के पीछे कक्षा में क्या चल रहा है. वकील एवं वजीराबाद के निवासी मनोज त्यागी का कहना है कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को धार्मिक आधार पर सेक्शन के बंटवारे के बारे में पता होना चाहिए. उन्होंने पूछा, “हम तो बाहर रहते थे लेकिन ये अधिकारी नियमित तौर पर निरीक्षण के लिए स्कूल आया करते थे. स्कूल मैनेज कमेटी भी वहां थी. क्या वे यह कहना चाहते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी?”

त्यागी ने कहा कि म्यूनिसिपल काउंसलर और यहां तक कि नॉर्थ दिल्ली के म्यूनिसिपल कॉर्परेशन के कमिश्नर अतीत में स्कूल का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने कहा, “इन अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए.”

क्षेत्र की म्यूनिसिपल काउंसलर अमर लता सांगवान ने कहा कि भले ही वह कुछ महीने पहले स्कूल के निरीक्षण के लिए आई थी लेकिन उन्हें धार्मिक आधार पर छात्रों को अलग-अलग सेक्शन में बांटने के बारे में जानकारी नहीं मिली. उन्होंने कहा कि अगर नगर निगम को इस बारे में पता चलता तो यह बात यहां तक नहीं पहुंचती.

काउंसलर यह जानने के लिए स्कूल में थी कि अगर वास्तव में बच्चों को अलग-अलग सेक्शन में बांटा गया है तो उन्हें फिर से एक कर दिया जाए. “सभी सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और जांच चल रही है. एक नया प्रिंसिपल भी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया है.”

सांगवान ने कहा कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई राजनीतिक कारण हो सकता है. क्या शेहरावत ने इसका कोई कारण बताया? काउंसर ने कहा, “उन्होंने केवल इतना कहा कि यह उनकी सोच थी.”

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