हिंदी न्यूज़ – जम्मू-कश्मीर निकाय चुनाव: कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को पहले चरण के लिए मतदान-Jammu and Kashmir civic polls voting to begin on October 8 amid tight security elections in 4 phases


जम्मू-कश्मीर में शहरी स्थानीय निकाय के पहले चरण के चुनाव से पहले तीन अलगाववादी नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया है. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी रविवार को नज़रबंद किए गए हैं.

मिरवाइज उमर फारूक ने ट्विटर पर अपनी नज़रबंदी की जानकारी दी है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘नजरबंद हूं. चुनाव की विचित्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है. बड़ी संख्या में बल तैनात किए गए हैं. पीएसए लगाने, लोगों को कैद और नजरबंद करने, छापेमारी करने, पाबंदियां लगाने और इंटरनेट पर रोक लगाने की प्रक्रिया तेज हुई है.’

उन्होंने कहा, ‘यह जिक्र नहीं करना चाहिए कि उम्मीदवार नामालूम हैं और जनता हैरान है. लोकतंत्र का क्या मजाक उड़ाया जा रहा है.’


पहले चरण के लिए सोमवार को वोटिंग

जम्मू-कश्मीर में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए प्रचार शनिवार सुबह खत्म हो गया. पहले चरण में करीब एक दर्जन जिलों के 422 वॉर्डों में मतदान सोमवार सुबह सात बजे शुरू होगा. पहले चरण में 1,283 उम्मीदवार मैदान में हैं. पहले चरण में जम्मू के 247 वॉर्ड, कश्मीर में 149 और लद्दाख के 26 वॉर्ड में चुनाव हो रहे हैं.

जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में प्रत्याशियों ने मतदाताओं को लुभाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी, लेकिन घाटी में प्रचार अभियान थोड़ा फीका रहा जहां धमकियों, हिंसा और राज्य की दो प्रमुख पार्टियों – नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के चुनावों का बहिष्कार करने की वजह से चुनावों पर संशय के बादल मंडरा रहे थे.

मतदान की तारीखें

पहले चरण के बाद 10 अक्टूबर को दूसरे चरण में 384 वॉर्ड, तीसरे चरण में 13 अक्टूबर को 207 वॉर्ड, और 16 अक्टूबर को आखिरी चरण में 132 वॉर्डों में वोट डाले जाएंगे. मतगणना 20 अक्टूबर को होगी. इससे पहले राज्य में 2005 में गुप्त मतदान के ज़रिए नगर निकाय चुनाव हुए थे और उनका पांच साल का कार्यकाल फरवरी 2010 में खत्म हो गया था.

2,990 उम्मीदवार मैदान में

जम्मू और श्रीनगर नगर निगमों समेत प्रदेश में कुल 1,145 वॉर्डों के लिए चार चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 2,990 उम्मीदवार मैदान में हैं. जम्मू क्षेत्र से कुल 2,137 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि श्रीनगर से 787 उम्मीदवार और लद्दाख क्षेत्र से 66 उम्मीदवार मैदान में हैं. कश्मीर घाटी में 231 और जम्मू में 13 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं.

एक चुनाव अधिकारी ने कहा, ‘प्रदेश में पहले चरण के चुनाव के लिए प्रचार शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो गए. कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है.’

खुलकर नहीं हुए चुनाव प्रचार

निकाय चुनावों के लिए कोई चुनावी रैली नहीं हुई है. घाटी के ज्यादातर हिस्सों में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार भी नहीं किया गया. उम्मीदवारों के नामों के साथ समूची प्रक्रिया गोपनीय नज़र आई. यहां तक कि उम्मीदवारों के राजनीतिक दलों से संबंधों का भी खुलासा नहीं किया गया.

संविधान के अनुच्छेद 35ए को सुप्रीम कोर्ट में विधिक चुनौती दिए जाने के चलते जम्मू-कश्मीर की दो मुख्य पार्टियां – नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ-साथ सीपीएम ने भी इन चुनावों से दूरी बनाई है. दोनों क्षेत्रीय दलों, एनसी और पीडीपी ने संवैधानिक प्रावधान पर केंद्र से अपना रुख शीर्ष अदालत में स्पष्ट करने को कहा है.

अलगाववादियों का चुनाव बहिष्कार

जहां अलगाववादियों ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया, वहीं आतंकवादियों ने इन चुनावों में भाग लेने वाले लोगों को निशाना बनाने की धमकी दी है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में मौजूदा स्थिति उम्मीदवारों को खुलकर चुनाव प्रचार करने की इजाज़त नहीं देती है, क्योंकि उनकी जान को खतरा है.

अधिकारी ने बताया कि उम्मीदवारों को सुरक्षा मुहैया की गई है और उनमें से ज्यादातर को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है. उन्हें न सिर्फ आतंकवादियों से खतरा है बल्कि भीड़ से भी खतरा है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर उम्मीदवारों की पहचान और अन्य ब्यौरे गुप्त रखे गए हैं.

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

अधिकारी ने बताया कि सुगम, निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. केंद्र सरकार ने केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 400 अतिरिक्त कंपनियां मुहैया कराई है. सुगम, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक सुरक्षित माहौल मुहैया करने की सर्वश्रेष्ठ कोशिश की जा रही है.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘आप जानते हैं कि स्थिति क्या है. हमारे उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करना संभव कैसे है? शुक्रवार को एक राजनीतिक दल के दो कार्यकर्ताओं की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. ऐसी स्थिति में जब सुरक्षा की भावना नहीं है, हम वोट मांगने कैसे जा सकते हैं. राज्य में चुनाव के लिए माहौल सौहार्दपूर्ण नहीं है. लेकिन इसे केंद्र ने हम पर थोप दिया.’

78 वॉर्डों में कोई मुकाबला नहीं

उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पर प्रशासन के गोपनीयता बरतने का असर चुनाव प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है. प्रथम चरण के तहत सोमवार को 12 जिलों में 30 नगर निकायों के 422 वॉर्डों में चुनाव होंगे. इन 422 वॉर्डों में 78 वॉर्डों में कोई मुकाबला नहीं है जिनमें से 69 कश्मीर में हैं जबकि नौ जम्मू में हैं.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शालीन काबरा ने बताया कि प्रथम चरण के लिए 1473 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है. नामांकन पत्रों की जांच के बाद 1441 नामांकन वैध घोषित किए गए. कुछ ने नाम वापस ले लिए, जिसके बाद 1283 उम्मीदवार प्रथम चरण के लिए चुनावी मैदान में हैं.
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण के लिए चुनाव प्रचार शनिवार को खत्म हो गया. प्रथम चरण में श्रीनगर नगर निगम के तीन वॉर्ड भी शामिल हैं.

राज्यपाल ने की सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा

इस बीच एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने प्रथम चरण के मतदान से पहले शनिवार को सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की थी. प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने राजभवन में नागरिक, पुलिस, केंद्रीय अर्द्धसैनिक पुलिस, थल सेना और राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक कर सुरक्षा प्रबंध के विषयों की विस्तृत समीक्षा की.

कश्मीर घाटी में बढ़ाई गई सुरक्षा

कश्मीर घाटी में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और सुरक्षा बलों ने सुरक्षा जांच और गश्त बढ़ा दी है जिससे लोगों में मतदान को लेकर किसी तरह का डर न रहे. अधिकारियों ने रविवार को ये जानकारी दी.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘मतदान को सुगमतापूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.’ उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने मतदान के मद्देनज़र शहर और घाटी के दूसरे इलाकों में गाड़ियों की जांच, तलाशी और इलाके में गश्त बढ़ा दी है. उन्होंने कहा, ‘शहर में कई चेक-प्वाइंट बनाए गए हैं जहां गाड़ियों की जांच की जा रही है. गाड़ियों की जांच के लिए खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है. हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई अप्रिय घटना न हो.’

उम्मीदवारों को सुरक्षा

अधिकारी ने कहा कि मतदान के लिए सुरक्षित माहौल देना एक चुनौती थी, लेकिन विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल है और घाटी के लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘हम पूर्ण सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं. अधिकतर उम्मीदवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और कुछ को सुरक्षा भी प्रदान की गई है. इलाके को अभियान और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मौजूदगी से सुरक्षित किया जा रहा है इसके साथ ही गश्त भी बढ़ाई गई है.’

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती पर काम किया गया है और संवेदनशील इलाकों का ध्यान रखा गया है. अधिकारी ने कहा कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा सख्त है और उनके आसपास मजबूत सुरक्षा घेरा है.

सुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश

कश्मीर में सीआरपीएफ के महानिरीक्षक रविदीप सिंह शाही ने कहा, ‘समूची कश्मीर घाटी में माहौल नियंत्रण में है और लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश की जा रही है जिससे वो बेखौफ होकर मतदान के लिए आ सकें.’





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