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Wednesday, October 10, 2018

हिंदी न्यूज़ – स्पोर्ट्स जगत में #Metoo, ज्वाला गुट्टा से लेकर क्रिकेट की दुनिया तक- Metoo in sports, sexual harassment cases which didn’t buy justice to victims


सोशल मीडिया पर चल रहे #Metoo अभियान ने दुनियाभर में खलबली मचा दी है. अब इस अभियान में पूर्व भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा शामिल हुई हैं. उन्होंने ट्विटर पर अपने साथ हुए मानसिक उत्पीड़न को लेकर आवाज़ उठाई है. उन्होंने बताया है कि टॉप प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दिया गया. 35 साल की ज्वाला ने उस व्यक्ति का नाम नहीं बताया है जिसने उन्हें बाहर किया. उन्होंने आगे बताया कि उनके पार्टनर को भी धमकी दी गई और परेशान किया गया.

उन्होंने लिखा है, “शायद मुझे भी #Metoo के जरिए अपने साथ हुए मानसिक उत्पीड़न के बारे में बात करनी चाहिए. साल 2006 में यह व्यक्ति चीफ बना था. इसने मुझे राष्ट्रीय टीम से चैंपियन होने के बावजूद बाहर निकाल दिया. पिछले सालों के दौरान जब मैं रियो से लौटी तो मुझे फिर से टीम से निकाल दिया गया. यही एक वजह रही कि मैंने खेलना बंद कर दिया.”

“जब यह व्यक्ति मेरा सीधेतौर पर कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था तो उसने मेरे पार्टनर्स को धमकी दी और परेशान किया. वह चाहता था कि मैं अकेली पड़ जाऊं. रियो के बाद जिसके साथ मुझे मिक्स्ड खेलना था, उसे धमकी दी गई और मुझे टीम से बाहर निकाल दिया गया.”

वैसे ज्वाला गुट्टा ने तो अपनी आप बीती बयां कर दी लेकिन स्पोर्ट्स की दुनिया यौन और मानसिक उत्पीड़न से भरी हुई है. पिछले सालों के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें खिलाड़ियों को तरह-तरह के मामलों से दो-चार होना पड़ा और न्याय के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिला. आइए हम आपको ऐसे ही 4 मामलों से रूबरू कराते है.– नेशनल लेवल जिमनास्ट और कोच पर लगा यौन उत्पीड़न (sexual harassment) का आरोप

2014 एशियन गेम्स के दौरान एक महिला जिमनास्ट ने कोच मनोज राना और जिमनास्ट चंदन पाठक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. कथिततौर पर दोनों ने महिला खिलाड़ी के लिबाज़ को लेकर अश्लील बातें कही थीं. जिमनास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (FGI) ने वादा किया था कि अगर पाठक और राणा दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

बहरहाल, SAI के डायरेक्टर जनरल जिजि थाम्पसन ने इस बात की ओर इशारा किया कि पुलिस के पास जाकर 29 साल की महिला खिलाड़ी ने खुद ही गलती की है. उन्होंने कहा था, “पी़ड़ित महिला ने हमारे पास कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई. उसे पहले SAI के पास शिकायत दर्ज करवानी चाहिए थी. वह भारतीय दल का हिस्सा नहीं थीं लेकिन ‘आओ और खेलो’ स्कीम के तहत स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रही थीं. अगर वह हमारे पास आकर शिकायत करतीं तो हम तुरंत एक्शन लेते लेकिन वह सीधे पुलिस के पास पहुंच गईं. हमने अभी भी जांच शुरू कर दी है.” उन्होंने आगे कहा था, मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती. SAI ने जांच शुरू कर दी है.

दोनों कोच एशियन गेम्स के लिए बाद में इंचियॉन गए. इसके बाद में इस मुद्दे से संबंधित कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई और मामला दब गया.
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– महिला हॉकी खिलाड़ियों ने चीफ कोच पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

साल 2010 में महिला हॉकी टीम की कुछ खिलाड़ियों ने उस समय के कोच महाराज कृष्णन कौशिक के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी. कौशिक, जो अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं. उन पर आरोप लगा था कि उनकी मांगों को न पूरी करने वाली खिलाड़ी को वह टीम में शामिल नहीं करते थे. इस शिकायत के बाद कौशिक को बर्खास्त कर दिया गया लेकिन कौशिक का एक बड़ी नौकरी इंतज़ार कर रही थी. उन्हें साल 2014 में सेंट्रल ज़ोन का हाई परफॉर्मेंस मैनेजर नियुक्त कर दिया गया. उन्हें इस दौरान अकेडमी के कोचों और अन्य राज्यों के खिलाड़ियों को कोच करने की जिम्मेदारी दी गई. अब ऐसा लगता है कि उनके 2010 में हुए मामले से कोई लेना देना ही नहीं है. एक और आरोपी इस तरह से अपनी गुनाहों की सज़ा से बच गया.

टीम में सेलेक्शन को लेकर ACA सेक्रेटरी ने महिला खिलाड़ियों से की यौन संबंध बनाने की मांग:

साल 2009 में टीम इंडिया के पूर्व मैनेजर और आंध्र क्रिकेट असोसिएशन के सेक्रेटरी वी चामुंडेश्वरनाथ पर महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए यौन संबंध बनाने की मांग करने का आरोप लगा था. शिकायत के बाद उन्हें ACA सेक्रेटरी के पद से बर्खास्त कर दिया गया और पुलिस ने उनके नाम पर केस दर्ज कर लिया.

आंध्र महिला टीम की पूर्व खिलाड़ी सविता कुमारी ने भी ACA के साथ आधिकारिक शिकायत दर्ज करवाई और बताया कि चामुंडेश्वरनाथ ने ट्रेनिंग कैंप के दौरान कई महिला खिलाड़ियों के साथ गलत व्यवहार किया.

एक अन्य रणजी क्रिकेटर दुर्गा भवानी ने चामुंडेश्वरनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. उन्होंने कथित तौर पर सुइसाइड (आत्महत्या) कर लिया. गौर करने वाली बात है कि सुइसाइड के कुछ दिन पहले ही उन्होंने इस केस को वापस लिया था इसलिए शक की सुई सीधे चामुंडेश्वरनाथ पर गई और पूरा केस रहस्य में लिपटा नजर आया.

जब कोच से परेशान महिला बॉक्सर ने किया सुइसाइड:

साल 2009 में कोच के द्वारा लगातार सताए जाने से परेशान होकर एक युवा महिला बॉक्सर ने सुइसाइड (अत्महत्या) कर लिया. एस अमरावती अपने कोच ओमकार यादव से हुए कई झगड़े नहीं सह पाईं और उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम के अंदर ज़हर पीकर मौत को गले लगा लिया.

21 साल की यह खिलाड़ी जूनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियन थीं और वह एक शानदार खिलाड़ी थीं. साल 2004 में सदर्न विमन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था. साल 2006 में उन्होंने सीनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप मेंब्रॉन्ज मेडल जीता था.

उनकी मौत के बाद एक जांच शुरू की गई. बहरहाल, हॉस्टल अधिकारियों ने सभी आरोपों को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि वह आत्म सम्मान की कमी की वजह से परेशान थीं. यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है कि एक मेडल जीतने वाली खिलाड़ी में इतना आत्मविश्वास कैसे कम हो सकता है कि वह आत्महत्या ही कर ले.





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