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Thursday, October 11, 2018

हिंदी न्यूज़ – जनसत्ता पार्टी के नाम से लोकसभा चुनाव के मैदान में उतर सकते हैं राजा भैया!_Raghuraj pratap singh likely to name his political party as jansatta Party UPAS


उत्तर प्रदेश में नए राजनीतिक दल की कवायद में जुटे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की नई पार्टी के नाम पर कयासबाजी तेज हो गई है. इस बीच राजा भैया के नाम से बने एक फेसबुक पेज पर राजा भैया की नई पार्टी का नाम चर्चा में है. ये नाम है जनसत्ता पार्टी. दावा किया जा रहा है कि अगामी लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर राजा भैया की ये पार्टी चुनाव लड़ेगी. सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग में राजा भैया की तरफ नई पार्टी के लिए तीन नाम दिए गए हैं. इनमें जनसत्ता पार्टी का नाम भी शामिल है.

उधर खबर आ रही है कि समाजवादी पार्टी रघुराज की इस पार्टी की कवायद में अहम भूमिका निभा रहे एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी के खिलाफ एक्शन ले सकती है. उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में सपा से निष्काषित किया जा सकता है. बता दें कि कहा जा रहा है 30 नवम्बर को लखनऊ के जनेश्वर पार्क में राजा भैया रैली कर सकते हैं. इस दौरान वह अपनी नई पार्टी के पदाधिकारियों की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं.

बता दें पिछले कई महीनों से राजा भैया के समर्थक पार्टी बनाने को लेकर जनता के बीच सर्वे कर रहे थे. उधर राजनितिक गलियारों में राजा भैया के नई पार्टी बनाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है. बता दें राजा भैया प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा से विधायक हैं.

दरअसल रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की इस कवायद को सवर्णों को लामबंद करने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है. बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुए मतभेद के बाद से ही वे नई सियासी जमीन तलाश रहे हैं. कहा जा रहा है कि सपा से रिश्ते खराब होने के बाद राजा भैया का यह बड़ा सियासी दांव है.वैसे राजा भैया बीजेपी और सपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. लेकिन योगी सरकार में उनकी एंट्री मंत्रिमंडल में नहीं हो सकी है. राजा भैया लगातार आठवीं बार विधायक हैं. 1993 से वह कुंडा से निर्दलीय जीतते आ रहे हैं. 1997 में बीजेपी की कल्याण सिंह की सरकार में वह पहली बार मंत्री बने थे. 2002 में बसपा सरकार में विधायक पूरन सिंह बुंदेला को धमकी देने के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था.

बाद में मुख्यमंत्री मायावती ने उन पर पोटा लगा दिया था. करीब 18 महीने वह जेल में रहे. 2003 में मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री बनने के बाद राजा भैया के ऊपर से पोटा हटा लिया और उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया, तब से वह लगातार सपा के साथ थे.

अखिलेश सरकार में भी वह मंत्री बने रहे. इस बीच कुंडा में सीओ जियाउल हक की हत्या में नाम आने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया. लेकिन राज्यसभा चुनाव में मायावती के उम्मीदवार को सपा का समर्थन मिलने के बाद राजा भैया ने क्रॉस वोटिंग की, जिसके बाद से दोनों के रिश्तों में खटास आ गई. इस बीच उनकी नजदीकियां बीजेपी नेताओं से भी रही, लेकिन वे योगी मंत्रीमंडल में शामिल नहीं हो सके. हालांकि यह चर्चा लगातार बनी रही कि वे बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. लेकिन राजा भैया भाजपा में शामिल नहीं हुए.

(रिपोर्ट: अजीत सिंह/रोहित सिंह)

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