हिंदी न्यूज़ – सलाम सावित्री गरजोला… जैविक कृषि से तुमने बदल दी अपने गांव की किस्मत – Salute to Savitri Garjola…. You changed fate of your village by Organic Farming


सलाम सावित्री गरजोला... जैविक कृषि से तुमने बदल दी अपने गांव की किस्मत
रामनगर के मनकंठपुर गांव की सावित्री गरजोला अपने गांव ही नहीं क्षेत्र में जैविक खेती की झंडाबरदार के रूप में जानी जाती हैं.
Govind Patni

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| News18 Uttarakhand

Updated: October 5, 2018, 2:18 PM IST

रामनगर में एक महिला के जीवट से पूरा गांव जैविक खेती करने वाले गांव में तब्दील हो गया है. हालांकि इस काम में इस महिला को अपने जीवन के बेशकीमती 17 साल देने पड़े लेकिन आज उनके साथ जिस तरह गांव की बाकी महिलाएं भी सशक्त हुई हैं उससे उन्हें अपनी मेहनत सफल लगती है. वह महिला हां रामनगर के मनकंठपुर गांव की सावित्री गरजोला. आज वह अपने गांव ही नहीं क्षेत्र में जैविक खेती की झंडाबरदार के रूप में जानी जाती हैं.

सावित्री गरजोला ने 17 साल पहले अपने खेत में जैविक खेती की शुरुआत की थी. वह खेती करने के साथ ही इसके फ़ायदे भी लोगों को बताती रहीं और धीरे-धीरे महिलाएं उनसे जुड़ने लगीं. अब उन्होंने गांव में महिलाओं का एक समूह भी बनाया है जो जैविक खेती करता है. सावित्री जैविक खेती की ट्रेनिंग भी देती हैं और यह ट्रेनिंग लेने सिर्फ़ आस-पास के इलाकों से ही नहीं हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र तक से लोग आते हैं.

सावित्री बताती हैं कि जैविक खेती से उत्पादन तो रासायनिक खादों के मुकाबले कम होता है लेकिन इन उत्पादों की कीमत अच्छी मिल जाती है. इसके साथ ही इस गांव के लोग इनकी प्रेरणा से जैविक कम्पोस्ट का उत्पादन भी करते हैं जिसको बाजार में बेचा जाता है. जैविक कम्पोस्ट खाद भी महिला समूह बड़ी मात्रा में अन्य राज्यों को बेचता है जिससे समूह को अच्छी आमदनी हो जाती है.

रामनगर के इस साधारण सी ग्रामीण महिला को इनके काम से क्षेत्र ही नहीं देश भर में प्रसिद्धि मिली है और इसके साथ ही दूर-दूर तक पहुंचा है उनके गांव मनकंठपुर का नाम. इसलिए स्थानीय लोग उनके काम की प्रशंसा करते नहीं थकते. अब गांव की सभी महिलाएं इनके बताये रास्ते पर चलते हुए अब कम्पोस्ट बनाने में एक्सपर्ट हो गई हैं और अपने परिवार के साथ ही समाज को स्वस्थ रखने का प्रयास कर रही हैं.जैविक खेती से जहां रासायनिक व जैविक खाद का खर्चा साल दर साल कम होता चला जाता है. वहीं खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती जाती है. इससे उत्पन्न होने वाले उत्पाद पौष्टिक होने के साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भी होते हैं. इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है. जैविक खेती में अपनी मिसाल पेश करने वाली सावित्री गरजोला को न्यूज18 भी सलाम करता है.

 

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