गरीबी की परिभाषा तय नहीं कर पा रही सरकार, 2.5 लाख पर टैक्स वसूली, 8 लाख पर आरक्षण

गरीबी की परिभाषा तय नहीं कर पा रही सरकार, 2.5 लाख पर टैक्स वसूली, 8 लाख पर आरक्षण

66 हजार रुपए प्रति माह तक कमाने वालों को सरकार मानती है गरीब

केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है। सरकार की ओर से आरक्षण का लाभ उन परिवारों को दिया जाएगा, जो आर्थिक तौर पर पिछड़े हैं। मतलब जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है। इस विधेयक पर कैबिनेट की मुहर लग गई है। लेकिन अभी संसद की मुहर लगनी बाकी है। हालांकि सरकार की तरफ से आरक्षण के दायरे में आने वालों के लिए गरीबी को जो परिभाषा गढ़ी गई है, वो गले नहीं उतर रही है। इसे लेकर आर्थिक जानकार सवाल उठा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 8 लाख आमदनी के दायरे में 95 फीसदी कवर हो जाएंगे। ऐसे में क्या 10 फीसदी आरक्षण कारगर होगा। 

गरीबी की परिभाषा गढ़ने में सरकार नाकाम 

आर्थिक जानकारों की मानें तो सरकार ने आरक्षण देने के लिए गरीबी की जो सीमा तय की है, उसमें कई खामियां है। एक तरफ सरकार 2.5 लाख से ज्यादा कमाई करने वालों से टैक्स लेती है, क्योंकि सरकार की नजरों में 2.5 लाख सालाना कमाने वाला अमीर होता है, जबकि दूसरी तरफ 8 लाख रुपए से कम वालों को आर्थिक तौर पर कमजोर बताया जा रहा है और उनके आर्थिक पिछड़ेपन के लिए आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है।

66 हजार रुपए प्रति माह कमाने वालों को सरकार मानती है गरीब 

अगर सरकार की ही थ्योरी को सच माना जाएं, तो 8 लाख सालाना कमाई के हिसाब से प्रति माह 66 हजार रुपए की इनकम हुई। ऐसे मे 66 हजार रुपए प्रति माह की कमाई वाला गरीब हुआ। एक अनुमान के मुताबिक भारत में नौकरीपेशा करने वालों का एक बड़ा तबका है, जिन्हें 15 हजार रुपए न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती है। यहां तक की दिल्ली सरकार को 15 हजार रुपए न्यूनतम मजदूरी करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। ऐसे में 66 हजार रुपए प्रति माह कमाने वाले गरीब कैसे हुआ। 

किसे मिलेगा आरक्षण का फायदा

ऐसे सवर्ण परिवार, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है, उन्हें 10 फीसदी आरक्षण के दायरे में लाया जाएगा। इसके साथ ही शहरी सवर्ण परिवार, जिनका शहर में 1000 स्क्वेयर फीट से छोटा मकान है और 5 एकड़ से कम की कृषि भूमि है, उन्हें भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। 

आरक्षण का मौजूदा सीमा

मौजूदा समय में 49.5 फीसदी आरक्षण की सीमा तय है। इसमें से ओबीसी को 27 फीसदी, एससी को 15 फीसदी और एसटी को 7.5 फीसदी के हिसाब से आरक्षण मिलता है। बाकी 50.5 % आरक्षण जनरल कैटेगरी के लिए रखा गया। 
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